श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  14.81.10-11h 
तस्य शान्तिमकृत्वा त्वं त्यजेथा यदि जीवितम्॥ १०॥
कर्मणा तेन पापेन पतेथा निरये ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
यदि तुमने उसे प्रसन्न किए बिना ही प्राण त्याग दिए होते, तो उस पापकर्म के प्रभाव से तुम अवश्य ही नरक में पड़ते । 10 1/2॥
 
If you had given up your life without appeasing him, you would have definitely fallen into hell due to the effect of that sinful act. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)