श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  14.80.52 
तस्मिन् न्यस्ते मणौ वीरो जिष्णुरुज्जीवित: प्रभु:।
चिरसुुप्त इवोत्तस्थौ मृष्टलोहितलोचन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस मणि के वहाँ रखते ही महारथी अर्जुन पुनः जीवित हो उठे और अपनी लाल आँखें मलने लगे, मानो कोई बहुत देर की नींद से जागा हो ॥52॥
 
As soon as that gem was placed there, the mighty warrior Arjuna came back to life, rubbing his red eyes like a man who has just woken up after a long sleep. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)