श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  14.80.51 
इत्युक्त: स्थापयामास तस्योरसि मणिं तदा।
पार्थस्यामिततेजा: स पितु: स्नेहादपापकृत्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
उलूपी की यह बात सुनकर महाप्रतापी एवं निष्पाप बभ्रुवाहन ने प्रेमपूर्वक वह मणि अपने पिता पार्थ की छाती पर रख दी।
 
Upon hearing Ulupi say this, Babhruvahana, the illustrious and sinless person, lovingly placed the gem on his father Partha's chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)