Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.39: ये पाण्डुपुत्र धनंजय अपूर्व वीर, अपार यशस्वी, धर्मात्मा और मेरे पिता थे। इन्हें मारकर मैंने महान पाप किया है। अब मेरा उद्धार कैसे हो सकता है?॥39॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एष एको महातेजा: पाण्डुपुत्रो धनंजय:।
पिता च मम धर्मात्मा तस्य मे निष्कृति: कुत:॥ ३९॥
अनुवाद
ये पाण्डुपुत्र धनंजय अपूर्व वीर, अपार यशस्वी, धर्मात्मा और मेरे पिता थे। इन्हें मारकर मैंने महान पाप किया है। अब मेरा उद्धार कैसे हो सकता है?॥39॥
This son of Pandu, Dhananjaya, was a matchless hero, of immense glory, a virtuous man and my father. By killing him I have committed a great sin. How can I be saved now?'॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥