Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.22: आज वह मेरे पिता अर्जुन को, जिन्हें युद्ध में मारना अत्यन्त कठिन है, जो युद्ध में शत्रुओं का नाश करने वाले और समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं, मेरे हाथों से मरे हुए पड़े हुए देख रही है॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आज वह मेरे पिता अर्जुन को, जिन्हें युद्ध में मारना अत्यन्त कठिन है, जो युद्ध में शत्रुओं का नाश करने वाले और समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं, मेरे हाथों से मरे हुए पड़े हुए देख रही है॥ 22॥
Today she is seeing my father Arjuna, who is extremely difficult to kill in a battle, who is the destroyer of enemies in war and the best among all weapon holders, lying dead at my hands.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥