Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.13: मृत्यु के वश में पड़ा हुआ मेरा यह बालक सदा के लिए भूमि पर सो जाए, परंतु निद्रा का स्वामी, विजयी लाल नेत्रों वाला अर्जुन अवश्य जीवित रहे - यही उत्तम है ॥13॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मृत्यु के वश में पड़ा हुआ मेरा यह बालक सदा के लिए भूमि पर सो जाए, परंतु निद्रा का स्वामी, विजयी लाल नेत्रों वाला अर्जुन अवश्य जीवित रहे - यही उत्तम है ॥13॥
This child of mine, fallen into the grip of death, may sleep on the ground forever, but the lord of sleep, the victorious red-eyed Arjuna, must surely remain alive - this is best. ॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥