श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 8: संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश और धनकी प्राप्ति तथा मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  14.8.d1 
(तत्र गत्वा त्वमन्वास्य महायोगेश्वरं शिवम्।
कुरु प्रणामं राजर्षे भक्त्या परमया युत:॥ )
 
 
अनुवाद
राजर्षे! वहां जाकर महायोगेश्वर शिव को अत्यंत भक्तिभाव से प्रणाम करें।
 
Rajarshe! Go there and pay obeisance to Mahayogeshwar Shiva with utmost devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)