vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 8: संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश और धनकी प्राप्ति तथा मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना
»
श्लोक 34
श्लोक
14.8.34
सुवर्णमाहरिष्यन्तस्तत्र गच्छन्तु ते नरा:।
इत्युक्त: स वचस्तेन चक्रे कारन्धमात्मज:॥ ३४॥
अनुवाद
आपके सेवक वहाँ जाकर सोना ले आएं। उनके ऐसा कहने पर करंधम के पौत्र मरुत्त ने वैसा ही किया।
Your servants should go there to bring gold. On his saying so, Marutta, the grandson of Karandham did the same. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×