श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 8: संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश और धनकी प्राप्ति तथा मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  14.8.34 
सुवर्णमाहरिष्यन्तस्तत्र गच्छन्तु ते नरा:।
इत्युक्त: स वचस्तेन चक्रे कारन्धमात्मज:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
आपके सेवक वहाँ जाकर सोना ले आएं। उनके ऐसा कहने पर करंधम के पौत्र मरुत्त ने वैसा ही किया।
 
Your servants should go there to bring gold. On his saying so, Marutta, the grandson of Karandham did the same. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)