श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 8: संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश और धनकी प्राप्ति तथा मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना  »  श्लोक 12-d2h
 
 
श्लोक  14.8.12-d2h 
तस्मै भगवते कृत्वा नम: शर्वाय वेधसे॥ १२॥
(एभिस्तं नामभिर्देवं सर्वविद्याधरं स्तुहि)
 
 
अनुवाद
जगत् के रचयिता भगवान शंकर को नमस्कार करो और समस्त विद्याओं के स्वामी महादेवजी की निम्न नामों से स्तुति करो॥12॥
 
Salute Lord Shankar, the creator of the world, and praise Mahadevji, who possesses all the knowledge, with the following names. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)