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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 8: संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश और धनकी प्राप्ति तथा मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना
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श्लोक 1
श्लोक
14.8.1
संवर्त उवाच
गिरेर्हिमवत: पृष्ठे मुञ्जवान् नाम पर्वत:।
तप्यते यत्र भगवांस्तपो नित्यमुमापति:॥ १॥
अनुवाद
संवर्तने कहा - राजन् ! हिमालय की पृष्ठभूमि में मुंजवान नामक एक पर्वत है, जहाँ उमावल्लभ भगवान शंकर सदैव तपस्या करते रहते हैं ॥1॥
Samvartane said – King! There is a mountain named Munjwan in the background of Himalayas, where Umavallabh Lord Shankar always does penance. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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