श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  14.79.33 
तत: स बाल्यात् पितरं विव्याध हृदि पत्रिणा।
निशितेन सुपुङ्खेन बलवद् बभ्रुवाहन:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
बालसुलभ अविवेक के कारण उसने बिना परिणाम की चिंता किए अपने पिता की छाती पर सुन्दर पंख वाले तीखे बाण से गहरा घाव कर दिया।
 
Due to childish imprudence, without thinking about the consequences he struck a deep wound on his father's chest with a sharp arrow having beautiful feathers. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)