श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.79.25 
साधु साधु महाबाहो वत्स चित्राङ्गदात्मज।
सदृशं कर्म ते दृष्ट्वा प्रीतिमानस्मि पुत्रक॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु चित्रांगदकुमार! तुम्हें बधाई हो। पुत्र! तुम धन्य हो। पुत्र! तुम्हारा पराक्रम देखकर मैं तुम पर बहुत प्रसन्न हूँ॥ 25॥
 
‘Mahabahu Chitrangadakumara! Congratulations to you. Son! You are blessed. Son! Seeing your worthy prowess, I am very pleased with you.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)