श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.79.22 
सोऽभ्यगात् सह पुङ्खेन वल्मीकमिव पन्नग:।
विनिर्भिद्य च कौन्तेयं प्रविवेश महीतलम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जैसे साँप बिल में घुस जाता है, उसी प्रकार वह बाण पंख सहित अर्जुन के शरीर में घुस गया और उसे छेदकर पृथ्वी में समा गया।
 
Just like a snake enters a hole, similarly that arrow along with its feather entered Arjun's body and after piercing him, disappeared into the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)