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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु
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श्लोक 2
श्लोक
14.79.2
मणिपूरेश्वरं त्वेवमुपयातं धनंजय:।
नाभ्यनन्दत् स मेधावी क्षत्रधर्ममनुस्मरन्॥ २॥
अनुवाद
मणिपुर नरेश को इस प्रकार आते देख परम बुद्धिमान धनंजय ने क्षत्रिय धर्म का आश्रय लिया और उनका आदर नहीं किया॥2॥
Seeing the Manipur king coming like this, the most intelligent Dhananjay took refuge in the Kshatriya religion and did not respect him. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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