सर्वोपकरणोपेतं युक्तमश्वैर्मनोजवै:।
सचक्रोपस्करं श्रीमान् हेमभाण्डपरिष्कृतम्॥ १५॥
परमार्चितमुच्छ्रित्य ध्वजं सिंहं हिरण्मयम्।
प्रययौ पार्थमुद्दिश्य स राजा बभ्रुवाहन:॥ १६॥
अनुवाद
उस रथ में सब प्रकार के युद्ध-सामग्री सजाकर रखी गई थी। मन के समान वेगवान घोड़े जुते हुए थे। चक्र और अन्य आवश्यक वस्तुएँ भी मौजूद थीं। स्वर्ण के बर्तन उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। वह रथ सोने का ही बना था। उस पर सिंह का चिह्नवाला एक ऊँचा ध्वज लहरा रहा था। उस परम पूजनीय और उत्तम रथ पर सवार होकर पूजनीय राजा बभ्रुवाहन अर्जुन का सामना करने के लिए आगे बढ़े॥15-16॥
All kinds of war equipment were kept decorated in that chariot. Horses as fast as the mind were harnessed. Chakras and other necessary items were also present. Golden utensils enhanced its beauty. That chariot was made of gold only. A high flag with the symbol of a lion was fluttering on it. Riding on that most revered and excellent chariot, the revered king Babruvahan advanced forward to face Arjun.॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥