श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध एवं अर्जुनकी मृत्यु  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.79.12 
युध्यस्वैनं कुरुश्रेष्ठं पितरं युद्धदुर्मदम्।
एवमेष हि ते प्रीतो भविष्यति न संशय:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे पिता कुरुवंश के श्रेष्ठ योद्धा हैं और सदैव युद्ध के उन्माद में मग्न रहते हैं। अतः तुम्हें उनसे युद्ध करना चाहिए। ऐसा करने से वे तुम पर प्रसन्न होंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।॥12॥
 
‘Your father is the best warrior of the Kuru clan and is always intoxicated with the ecstasy of war. Therefore, you must fight with him. By doing so, he will be pleased with you. There is no doubt about this.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)