vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 76: अर्जुनके द्वारा वज्रदत्तकी पराजय
»
श्लोक 16
श्लोक
14.76.16
तत: पुनरभिक्रुद्धो राजा प्राग्ज्योतिषाधिप:।
प्रेषयामास नागेन्द्रं बलवत् पर्वतोपमम्॥ १६॥
अनुवाद
तब प्राग्ज्यौतिषपुर के स्वामी राजा वज्रदत्त ने अत्यन्त क्रोधित होकर अपने पर्वत समान राजा गजराज को पुनः बलपूर्वक आगे बढ़ाया ॥16॥
Then King Vajradatta, the lord of Pragjyotishpur, became very angry and again pushed his mountain-like king Gajraj forward with force. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×