श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 75: अर्जुनका प्राग्ज्योतिषपुरके राजा वज्रदत्तके साथ युद्ध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.75.20 
स तैर्विद्धो महानागो विस्रवन् रुधिरं वभौ।
गैरिकाक्तमिवाम्भोऽद्रिर्बहुप्रस्रवणं तदा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उन बाणों से घायल होकर वह महासर्प बहुत अधिक रक्त बहाने लगा। उस समय वह गेरू मिश्रित जल की धाराओं से युक्त अनेक झरनों वाले पर्वत के समान दिखाई देने लगा।
 
Wounded by those arrows, that great serpent started bleeding profusely. At that time, he appeared like a mountain with many waterfalls flowing with streams of ochre-mixed water.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि वज्रदत्तयुद्धे पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अर्जुनका वज्रदत्तके साथ युद्धविषयक पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)