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स तैर्विद्धो महानागो विस्रवन् रुधिरं वभौ।
गैरिकाक्तमिवाम्भोऽद्रिर्बहुप्रस्रवणं तदा॥ २०॥
अनुवाद
उन बाणों से घायल होकर वह महासर्प बहुत अधिक रक्त बहाने लगा। उस समय वह गेरू मिश्रित जल की धाराओं से युक्त अनेक झरनों वाले पर्वत के समान दिखाई देने लगा।
Wounded by those arrows, that great serpent started bleeding profusely. At that time, he appeared like a mountain with many waterfalls flowing with streams of ochre-mixed water.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि वज्रदत्तयुद्धे पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अर्जुनका वज्रदत्तके साथ युद्धविषयक पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥