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mahabharat 14.73.4: राजन! यज्ञ में दीक्षित होकर धर्मराज युधिष्ठिर गले में स्वर्णमाला और सुवर्ण का हार पहने हुए प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 14.73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.73.4 
स राजा धर्मराड् राजन् दीक्षितो विबभौ तदा।
हेममाली रुक्मकण्ठ: प्रदीप्त इव पावक:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! यज्ञ में दीक्षित होकर धर्मराज युधिष्ठिर गले में स्वर्णमाला और सुवर्ण का हार पहने हुए प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे।
 
King! After being initiated in the yajna, Dharmaraja King Yudhishthira was shining like a blazing fire, wearing a golden garland and a golden necklace around his neck.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)