हे निष्पाप राजन! मैं यहाँ अर्जुन के उन युद्धों का वर्णन करूँगा जो दोनों ओर के योद्धाओं के लिए अधिक दुःखदायी और महान थे॥28॥
Sinless king! I will describe to you here those wars of Arjuna which were more painful and great for the warriors on both sides. 28॥
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वानुसरणे त्रिसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरणविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥