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mahabharat 14.73.14-16h: नरेन्द्र! दूसरे लोग ये बातें कहते थे - 'इस भीड़ में हम अर्जुन को तो नहीं देखते, परन्तु उसका धनुष तो देख सकते हैं। यह वही प्रसिद्ध गाण्डीव धनुष है, जिसकी टंकार भयानक होती है। अर्जुन की यात्रा सकुशल हो। मार्ग में उसे कोई कष्ट न हो। वह निर्भय होकर मार्ग पर आगे बढ़ता रहे। वह अवश्य ही सकुशल लौटेगा और उस समय हम उसे पुनः देखेंगे।'॥14-15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण  »  श्लोक 14-16h
 
 
श्लोक  14.73.14-16h 
अथापरे मनुष्येन्द्र पुरुषा वाक्यमब्रुवन्।
नैनं पश्याम सम्मर्दे धनुरेतत् प्रदृश्यते॥ १४॥
एतद्धि भीमनिर्ह्रादं विश्रुतं गाण्डिवं धनु:।
स्वस्ति गच्छत्वरिष्टो वै पन्थानमकुतोभयम्॥ १५॥
निवृत्तमेनं द्रक्ष्याम: पुनरेष्यति च ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! दूसरे लोग ये बातें कहते थे - 'इस भीड़ में हम अर्जुन को तो नहीं देखते, परन्तु उसका धनुष तो देख सकते हैं। यह वही प्रसिद्ध गाण्डीव धनुष है, जिसकी टंकार भयानक होती है। अर्जुन की यात्रा सकुशल हो। मार्ग में उसे कोई कष्ट न हो। वह निर्भय होकर मार्ग पर आगे बढ़ता रहे। वह अवश्य ही सकुशल लौटेगा और उस समय हम उसे पुनः देखेंगे।'॥14-15 1/2॥
 
Narendra! Other people used to say these things - 'We do not see Arjun in this crowd, but we can see his bow. This is the famous Gandiva bow which makes a terrifying sound. May Arjun's journey be safe. May he not face any trouble on the way. May he keep moving forward on the path fearlessly. He will definitely return safely and at that time we will see him again.'॥ 14-15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)