श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.73.12 
एष गच्छति कौन्तेय तुरगश्चैव दीप्तिमान्।
यमन्वेति महाबाहु: संस्पृशन् धनुरुत्तमम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(लोग कहते थे-) ‘यह कुन्तीपुत्र अर्जुन जा रहा है और वह चमकता हुआ घोड़ा जा रहा है, जिसके पीछे महाबाहु अर्जुन महान धनुष धारण किए हुए जा रहे हैं।’॥12॥
 
(People used to say -) 'This son of Kunti, Arjun is going and that shining horse is going, behind which the mighty-armed Arjun is going carrying a great bow.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)