श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.73.11 
तत: शब्दो महाराज दिश: खं प्रति पूरयन्।
बभूव प्रेक्षतां नॄणां कुन्तीपुत्रं धनंजयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय कुन्तीपुत्र धनंजय को देखने वाले लोगों के मुख से निकले हुए शब्द सम्पूर्ण दिशाओं और आकाश में गूँज रहे थे॥11॥
 
Maharaj! At that time, the words that came out of the mouths of the people who saw Kunti's son Dhananjaya were echoing in all directions and in the sky. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)