श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 73: सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.73.1 
वैशम्पायन उवाच
दीक्षाकाले तु सम्प्राप्ते ततस्ते सुमहर्त्विज:।
विधिवद् दीक्षयामासुरश्वमेधाय पार्थिवम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब दीक्षा का समय आया, तब व्यास आदि महर्षियों ने राजा युधिष्ठिर को अश्वमेध्ययज्ञ की विधिपूर्वक दीक्षा दी॥1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! When the time for initiation came, those great sages like Vyas etc. formally initiated King Yudhishthira into Ashwamedhyajna. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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