श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 72: व्यासजीकी आज्ञासे अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी, राज्य और नगरकी रक्षाके लिये भीमसेन और नकुलकी तथा कुटुम्ब-पालनके लिये सहदेवकी नियुक्ति  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  14.72.12-13 
युधिष्ठिर उवाच
अयमश्वो यथा ब्रह्मन्नुत्सृष्ट: पृथिवीमिमाम्।
चरिष्यति यथाकामं तत्र वै संविधीयताम्॥ १२॥
पृथिवीं पर्यटन्तं हि तुरगं कामचारिणम्।
क: पालयेदिति मुने तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "ब्राह्मण! यह घोड़ा उपस्थित है। इसे किस प्रकार मुक्त किया जाए कि यह अपनी इच्छानुसार सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण कर सके? आप इसकी व्यवस्था कीजिए। यह भी बताइए, मुनिवर! संसार में अपनी इच्छानुसार विचरण करने वाले इस घोड़े की रक्षा कौन करेगा?"॥12-13॥
 
Yudhishthira said, "Brahmin! This horse is present. How should it be released so that it can roam the entire earth as per its wish? You make arrangements for this. Also tell me, sage! Who will protect this horse which roams the world as per its wish?"॥12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)