श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.69.9 
अथवा धर्मराज्ञाहमनुज्ञाता महाभुज।
भक्षयिष्ये विषं घोरं प्रवेक्ष्ये वा हुताशनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! अब मैं धर्मराज की आज्ञा से या तो भयंकर विष का पान करूँगा अथवा प्रज्वलित अग्नि में लीन हो जाऊँगा॥9॥
 
‘Mahabaho! Now, with the permission of Dharamraj, I will either consume the dreadful poison or I will be immersed in the blazing fire.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)