vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना
»
श्लोक 9
श्लोक
14.69.9
अथवा धर्मराज्ञाहमनुज्ञाता महाभुज।
भक्षयिष्ये विषं घोरं प्रवेक्ष्ये वा हुताशनम्॥ ९॥
अनुवाद
महाबाहो! अब मैं धर्मराज की आज्ञा से या तो भयंकर विष का पान करूँगा अथवा प्रज्वलित अग्नि में लीन हो जाऊँगा॥9॥
‘Mahabaho! Now, with the permission of Dharamraj, I will either consume the dreadful poison or I will be immersed in the blazing fire.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×