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mahabharat 14.69.6: ‘पुत्र! तुम धर्म को जानने वाले पिता के पुत्र हो। फिर तुम अपने द्वारा किए जा रहे पापों को क्यों नहीं समझते? वृष्णिवंश के सबसे बड़े योद्धा भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे सामने खड़े हैं, तुम उन्हें प्रणाम क्यों नहीं करते?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 14.69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.69.6 
धर्मज्ञस्य सुत: स त्वमधर्मं नावबुध्यसे।
यस्त्वं वृष्णिप्रवीरस्य कुरुषे नाभिवादनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! तुम धर्म को जानने वाले पिता के पुत्र हो। फिर तुम अपने द्वारा किए जा रहे पापों को क्यों नहीं समझते? वृष्णिवंश के सबसे बड़े योद्धा भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे सामने खड़े हैं, तुम उन्हें प्रणाम क्यों नहीं करते?॥6॥
 
‘Son! You are the son of a father who knows the Dharma. Then why don’t you understand the sins you are committing? The greatest warrior of the Vrishni clan, Lord Krishna is standing in front of you, why don’t you bow to him?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)