धर्मज्ञस्य सुत: स त्वमधर्मं नावबुध्यसे।
यस्त्वं वृष्णिप्रवीरस्य कुरुषे नाभिवादनम्॥ ६॥
अनुवाद
‘पुत्र! तुम धर्म को जानने वाले पिता के पुत्र हो। फिर तुम अपने द्वारा किए जा रहे पापों को क्यों नहीं समझते? वृष्णिवंश के सबसे बड़े योद्धा भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे सामने खड़े हैं, तुम उन्हें प्रणाम क्यों नहीं करते?॥6॥
‘Son! You are the son of a father who knows the Dharma. Then why don’t you understand the sins you are committing? The greatest warrior of the Vrishni clan, Lord Krishna is standing in front of you, why don’t you bow to him?॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥