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mahabharat 14.69.5: हे भरतश्रेष्ठ! कुछ समय बाद जब उत्तरा को होश आया, तब वह अपने मृत पुत्र को गोद में लेकर इस प्रकार कहने लगी-॥5॥   |   mahabharat अध्याय 14.69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.69.5 
प्रतिलभ्य तु सा संज्ञामुत्तरा भरतर्षभ।
अङ्कमारोप्य तं पुत्रमिदं वचनमब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! कुछ समय बाद जब उत्तरा को होश आया, तब वह अपने मृत पुत्र को गोद में लेकर इस प्रकार कहने लगी-॥5॥
 
O best of the Bharatas! After some time when Uttara regained consciousness, she took her dead son in her lap and started saying this -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)