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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना
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श्लोक 3
श्लोक
14.69.3
मुहूर्तमिव राजेन्द्र पाण्डवानां निवेशनम्।
अप्रेक्षणीयमभवदार्तस्वनविनादितम् ॥ ३॥
अनुवाद
राजेन्द्र! दो घंटे तक पांडवों का वह महल करुण क्रंदन से गूंजता रहा। उस समय उसकी ओर देखना असम्भव था।
Rajendra! For two hours that palace of the Pandavas echoed with cries of pain. It was impossible to look at it at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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