श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  14.69.24 
इत्युक्तो वासुदेवेन स बालो भरतर्षभ।
शनै: शनैर्महाराज प्रास्पन्दत सचेतन:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! महाराज! भगवान श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर बालक को होश आ गया। वह धीरे-धीरे अपने अंग हिलाने लगा॥24॥
 
Bharatshrestha! Maharaj! When Lord Krishna said this, the child regained consciousness. He slowly started moving his limbs. 24॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि परिक्षित्संजीवने एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें परिक्षित् को जीवनदानविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)