इत्युक्तो वासुदेवेन स बालो भरतर्षभ।
शनै: शनैर्महाराज प्रास्पन्दत सचेतन:॥ २४॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! महाराज! भगवान श्रीकृष्ण के ऐसा कहने पर बालक को होश आ गया। वह धीरे-धीरे अपने अंग हिलाने लगा॥24॥
Bharatshrestha! Maharaj! When Lord Krishna said this, the child regained consciousness. He slowly started moving his limbs. 24॥
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि परिक्षित्संजीवने एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें परिक्षित् को जीवनदानविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥