श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.69.2 
तां तु दृष्ट्वा निपतितां हतपुत्रपरिच्छदाम्।
चुक्रोश कुन्ती दु:खार्ता सर्वाश्च भरतस्त्रिय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जिसका पुत्ररूपी कुल नष्ट हो गया था, उस उत्तरा को भूमि पर पड़ी हुई देखकर कुन्तीदेवी तथा भरतकुल की समस्त स्त्रियाँ शोक से विह्वल होकर अत्यन्त विलाप करने लगीं॥ 2॥
 
On seeing Uttarā lying on the ground, whose family in the form of her son had been destroyed, Kuntidevi and all the women of the Bharata clan, overwhelmed with grief, began to weep profusely.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)