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mahabharat 14.69.15: फिर उठकर धैर्य धारण करके मत्स्य राजकुमारी ने पृथ्वी पर ही हाथ जोड़कर कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम किया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 14.69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.69.15 
उत्थाय च पुनर्धैर्यात् तदा मत्स्यपते: सुता।
प्राञ्जलि: पुण्डरीकाक्षं भूमावेवाभ्यवादयत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
फिर उठकर धैर्य धारण करके मत्स्य राजकुमारी ने पृथ्वी पर ही हाथ जोड़कर कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम किया॥15॥
 
Getting up again and having patience, the Matsya Princess folded her hands on the earth itself and bowed to the lotus-eyed Lord Shri Krishna. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)