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mahabharat 14.69.13: "बेटा, उठो और ज्ञानी, जगत के स्वामी, श्री कृष्ण के सुन्दर मुख को देखो, जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ियों के समान हैं, जैसे मैं तुम्हारे पिता के मुख को देखा करता था, जिनके नेत्र चंचल थे।" ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 14.69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.69.13 
उत्तिष्ठ पश्य वदनं लोकनाथस्य धीमत:।
पुण्डरीकपलाशाक्षं पुरेव चपलेक्षणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
"बेटा, उठो और ज्ञानी, जगत के स्वामी, श्री कृष्ण के सुन्दर मुख को देखो, जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ियों के समान हैं, जैसे मैं तुम्हारे पिता के मुख को देखा करता था, जिनके नेत्र चंचल थे।" ॥13॥
 
"Son, get up and look at the beautiful face of the wise, Lord of the Universe, Sri Krishna, whose eyes are like the lotus petals, just as I used to look at the face of your father, whose eyes were restless." ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)