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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 69: उत्तराका विलाप और भगवान‍् श्रीकृष्णका उसके मृत बालकको जीवन-दान देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.69.1 
वैशम्पायन उवाच
सैवं विलप्य करुणं सोन्मादेव तपस्विनी।
उत्तरा न्यपतद् भूमौ कृपणा पुत्रगृद्धिनी॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अपने पुत्र के जीवन की कामना करने वाली तपस्विनी उत्तरा इस प्रकार विलाप करती हुई पागल हो गई और भूमि पर गिर पड़ी।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! The ascetic Uttara, who desired the life of her son, became mad and fell on the ground wailing in this pitiable manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)