श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 67: परीक्षित् को जिलानेके लिये सुभद्राकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  14.67.5-6 
किं नु वक्ष्यति धर्मात्मा धर्मराजो युधिष्ठिर:।
भीमसेनार्जुनौ चापि माद्रवत्या: सुतौ च तौ॥ ५॥
श्रुत्वाभिमन्योस्तनयं जातं च मृतमेव च।
मुषिता इव वार्ष्णेय द्रोणपुत्रेण पाण्डवा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अभिमन्यु का पुत्र जन्म लेते ही मर गया - यह सुनकर धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर क्या कहेंगे? भीमसेन, अर्जुन और माद्रीकुमार नकुल-सहदेव भी क्या सोचेंगे? श्रीकृष्ण! आज द्रोणपुत्र ने पाण्डवों का सर्वस्व लूट लिया ॥5-6॥
 
Abhimanyu's son died as soon as he was born - what would the pious king Yudhishthir say after hearing this? What would Bhimsen, Arjun and Madrikumar Nakul-Sahdev also think? Sri Krishna! Today Drona's son looted everything of the Pandavas. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)