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mahabharat 14.66.29: भरतनंदन! उन सबके ऐसा कहने के बाद जनार्दन श्रीकृष्ण ने कुन्तीदेवी को बैठाया और भूमि पर लेटी हुई अपनी बुआ को सांत्वना देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 14.66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.66.29 
एवमुक्ते तत: कुन्तीं पर्यगृह्णाज्जनार्दन:।
भूमौ निपतितां चैनां सान्त्वयामास भारत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! उन सबके ऐसा कहने के बाद जनार्दन श्रीकृष्ण ने कुन्तीदेवी को बैठाया और भूमि पर लेटी हुई अपनी बुआ को सांत्वना देने लगे।
 
Bharatanandan! After all of them said this, Janardan Sri Krishna helped Kunti Devi to sit and started consoling his aunt who was lying on the ground.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि परीक्षिज्जन्मकथने षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें परीक्षित् के जन्मका वर्णनविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)