भरतनंदन! उन सबके ऐसा कहने के बाद जनार्दन श्रीकृष्ण ने कुन्तीदेवी को बैठाया और भूमि पर लेटी हुई अपनी बुआ को सांत्वना देने लगे।
Bharatanandan! After all of them said this, Janardan Sri Krishna helped Kunti Devi to sit and started consoling his aunt who was lying on the ground.
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि परीक्षिज्जन्मकथने षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें परीक्षित् के जन्मका वर्णनविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥