श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.66.25 
इत्येतत् प्रणयात् तात सौभद्र: परवीरहा।
कथयामास दुर्धर्षस्तथा चैतन्न संशय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘तत्! शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले वीर योद्धा सुभद्राकुमार ने जो प्रेमपूर्वक कहा था, वह निस्सन्देह सत्य ही होगा ॥25॥
 
‘Tat! This must be undoubtedly true, which was lovingly said by Subhadrakumar, the brave warrior who killed the enemy warriors. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)