श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.66.20 
अस्मिन् प्राणा: समायत्ता: पाण्डवानां ममैव च।
पाण्डोश्च पिण्डो दाशार्ह तथैव श्वशुरस्य मे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मेरा और पाण्डवों का जीवन इसी बालक पर निर्भर है। दाशार्हकुलनन्दन! यह मेरे पति पाण्डु और ससुर विचित्रवीर्य के पिण्ड का भी आधार है। 20॥
 
My life and that of the Pandavas are dependent on this child. Dasharhakulnandan! This is also the support for my husband Pandu and father-in-law Vichitravirya's pinda. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)