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mahabharat 14.66.17: यदुनन्दन! प्रभु! जब अश्वत्थामा ने सरकण्डे का बाण मारा था, तब आपने प्रतिज्ञा की थी कि आप उत्तरा के मृत पुत्र को भी जीवित कर देंगे॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 14.66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.66.17 
त्वया ह्येतत् प्रतिज्ञातमैषीके यदुनन्दन।
अहं संजीवयिष्यामि मृतं जातमिति प्रभो॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदुनन्दन! प्रभु! जब अश्वत्थामा ने सरकण्डे का बाण मारा था, तब आपने प्रतिज्ञा की थी कि आप उत्तरा के मृत पुत्र को भी जीवित कर देंगे॥ 17॥
 
Yadunandan! Prabhu! When Ashvatthama had shot the arrow made of reed, you had vowed that you will bring back to life even the dead son of Uttara.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)