श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 66: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आगमन और उत्तराके मृत बालककोजिलानेके लियेकुन्तीकी उनसे प्रार्थना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.66.12 
ततस्त्वरितमायान्तीं ददर्श स्वां पितृष्वसाम्।
क्रोशन्तीमभिधावेति वासुदेवं पुन: पुन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उसने देखा कि उसकी बुआ कुंती बहुत तेजी से उसकी ओर आ रही है, बार-बार उसका नाम पुकार रही है और चिल्ला रही है, "वासुदेव, भागो, भागो!"
 
There he saw his aunt Kunti approaching him very quickly, calling his name repeatedly and shouting "Vasudev, run, run!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)