श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 64: पाण्डवोंका हिमालयपर पहुँचकर वहाँ पड़ाव डालना और रातमें उपवासपूर्वक निवास करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.64.16 
ततो निशा सा व्यगमन्महात्मनां
संशृण्वतां विप्रसमीरिता गिर:।
तत: प्रभाते विमले द्विजर्षभा
वचोऽब्रुवन् धर्मसुतं नराधिपम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महान पाण्डवों ने ब्राह्मणों की बातें सुनकर वह रात्रि सुरक्षित रूप से बिताई। फिर जब प्रातःकाल हुआ, तब उन महान ब्राह्मणों ने धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा।
 
Thereafter the great Pandavas spent that night safely listening to the words of the Brahmins. Then when the clear morning dawned those great Brahmins spoke thus to the son of Dharma, King Yudhishthira.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि द्रव्यानयनोपक्रमे चतु:षष्टितमोऽध्याय:॥ ६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें द्रव्य लानेका उपक्रमविषयक चौंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)