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mahabharat 14.64.13: धर्मराज राजा युधिष्ठिर के ये वचन सुनकर ब्राह्मण और पुरोहित उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा रखते हुए प्रसन्नतापूर्वक इस प्रकार बोले: ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 14.64: पाण्डवोंका हिमालयपर पहुँचकर वहाँ पड़ाव डालना और रातमें उपवासपूर्वक निवास करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.64.13 
श्रुत्वैतद् वचनं राज्ञो ब्राह्मणा: सपुरोधस:।
इदमूचुर्वचो हृष्टा धर्मराजप्रियेप्सव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज राजा युधिष्ठिर के ये वचन सुनकर ब्राह्मण और पुरोहित उन्हें प्रसन्न करने की इच्छा रखते हुए प्रसन्नतापूर्वक इस प्रकार बोले: ॥13॥
 
On hearing these words of Dharmaraja King Yudhishthira, the Brahmins and priests, wishing to please him, spoke happily as follows: ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)