श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 64: पाण्डवोंका हिमालयपर पहुँचकर वहाँ पड़ाव डालना और रातमें उपवासपूर्वक निवास करना  »  श्लोक 11-13h
 
 
श्लोक  14.64.11-13h 
अस्मिन् कार्ये द्विजश्रेष्ठा नक्षत्रे दिवसे शुभे॥ ११॥
यथा भवन्तो मन्यन्ते कर्तुमर्हन्ति तत् तथा।
न न: कालात्ययो वै स्यादिहैव परिलम्बताम्॥ १२॥
इति निश्चित्य विप्रेन्द्रा: क्रियतां यदनन्तरम्।
 
 
अनुवाद
‘हे ब्राह्मणो! शुभ दिन और शुभ नक्षत्र में इस कार्य की सफलता के लिए जो उचित समझो, वही करो। ऐसा न हो कि हम यहाँ लटके रहकर बहुत समय व्यतीत करें। ब्राह्मणो! इस विषय में कुछ निश्चय करके, इस समय जो कुछ करना उचित हो, उसे तुम लोग तुरंत करो।’॥11-12 1/2॥
 
‘O Brahmins! On an auspicious day and in an auspicious constellation, whatever you think is right for the success of this task, do that. It should not happen that we spend a lot of time by hanging here. Brahmins! After deciding something on this matter, whatever is appropriate to do at this time, you people should do it immediately.'॥ 11-12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)