श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरका अपने भाइयोंके साथ परामर्श करके सबको साथ ले धन ले आनेके लिये प्रस्थान करना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  14.63.3-4h 
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा द्वैपायनवचो धर्मराजो युधिष्ठिर:।
भ्रातॄन् सर्वान् समानाय्य काले वचनमब्रवीत्॥ ३॥
अर्जुनं भीमसेनं च माद्रीपुत्रौ यमावपि।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन ने कहा-राजन्! व्यासजी के वचन सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों - भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव - को बुलाया और ये समयोचित वचन कहे -॥ 3 1/2॥
 
Vaishmpayana said - King! After listening to Vyasji's words, Dharmaraja Yudhishthira called all his brothers - Bhimasena, Arjun, Nakul and Sahadev - and said these timely words -॥ 3 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)