श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरका अपने भाइयोंके साथ परामर्श करके सबको साथ ले धन ले आनेके लिये प्रस्थान करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  14.63.19-20 
ततो ययु: पाण्डुसुता ब्राह्मणान् स्वस्ति वाच्य च।
अर्चयित्वा सुरश्रेष्ठं पूर्वमेव महेश्वरम्॥ १९॥
मोदकै: पायसेनाथ मांसापूपैस्तथैव च।
आशास्य च महात्मानं प्रययुर्मुदिता भृशम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात ब्राह्मणों से स्वस्तिवाचन कराकर, श्रेष्ठ महेश्वर का पूजन करके, मिष्ठान्न, खीर, पूआ और फलों के गूदे से महेश्वर को तृप्त करके तथा उनका आशीर्वाद लेकर, सभी पाण्डवों ने अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक अपनी यात्रा आरम्भ की ॥19-20॥
 
Thereafter, after making the Brahmins recite Swastiva and worshiping the best Maheshwar, satisfying Maheshwar with sweets, kheer, pua and fruit pulps and taking his blessings, all the Pandavas started their journey very happily. 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)