श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 63: युधिष्ठिरका अपने भाइयोंके साथ परामर्श करके सबको साथ ले धन ले आनेके लिये प्रस्थान करना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  14.63.16-17 
श्रुत्वैवं वदतस्तस्य वाक्यं भीमस्य भारत॥ १६॥
प्रीतो धर्मात्मजो राजा बभूवातीव भारत।
अर्जुनप्रमुखाश्चापि तथेत्येवाब्रुवन् वच:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भारत! भीमसेन की यह बात सुनकर धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर बहुत प्रसन्न हुए। अर्जुन आदि अन्य लोगों ने भी उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह बात ठीक है।॥16-17॥
 
Bharat! Hearing this statement of Bhimsena, Dharmaputra King Yudhishthira became very happy. Arjuna and others also supported his words by saying that they are right.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)