vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 62: वसुदेव आदि यादवोंका अभिमन्युके निमित्त श्राद्ध करना तथा व्यासजीका उत्तरा और अर्जुनको समझाकर युधिष्ठिरको अश्वमेधयज्ञ करनेकी आज्ञा देना
»
श्लोक 13
श्लोक
14.62.13
धनंजयं च सम्प्रेक्ष्य धर्मराजस्य शृण्वत:।
व्यासो वाक्यमुवाचेदं हर्षयन्निव भारत॥ १३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाते हुए व्यासजी ने अर्जुन की ओर देखकर उसके हर्ष को बढ़ाते हुए कहा - 13॥
India After that, while narrating to Dharmaraja Yudhishthira, Vyasji looked at Arjuna and said to Arjuna, increasing his joy - 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×