श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 62: वसुदेव आदि यादवोंका अभिमन्युके निमित्त श्राद्ध करना तथा व्यासजीका उत्तरा और अर्जुनको समझाकर युधिष्ठिरको अश्वमेधयज्ञ करनेकी आज्ञा देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.62.13 
धनंजयं च सम्प्रेक्ष्य धर्मराजस्य शृण्वत:।
व्यासो वाक्यमुवाचेदं हर्षयन्निव भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाते हुए व्यासजी ने अर्जुन की ओर देखकर उसके हर्ष को बढ़ाते हुए कहा - 13॥
 
India After that, while narrating to Dharmaraja Yudhishthira, Vyasji looked at Arjuna and said to Arjuna, increasing his joy - 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)