Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.61.32-33: सुभद्रा का इस प्रकार विलाप सुनकर दुःख से विह्वल बुआ कुन्ती ने धीरे-धीरे उसे सान्त्वना देने का प्रयत्न किया और कहा - 'सुभद्रे! वसुदेव, सात्यकि और पिता अर्जुन ने जिस बालक अभिमन्यु को लाड़-प्यार से पाला था, वह काल के नियम से मारा गया है (उसकी आयु पूरी हो गई है, अतः वह मृत्यु के अधीन हो गया है)।॥ 32-33॥ | mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमादि तु वार्ष्णेय्यास्तस्यास्तत्परिदेवितम्।
श्रुत्वा पृथा सुदु:खार्ता शनैर्वाक्यमथाब्रवीत्॥ ३२॥
सुभद्रे वासुदेवेन तथा सात्यकिना रणे।
पित्रा च लालितो बाल: स हत: कालधर्मणा॥ ३३॥
अनुवाद
सुभद्रा का इस प्रकार विलाप सुनकर दुःख से विह्वल बुआ कुन्ती ने धीरे-धीरे उसे सान्त्वना देने का प्रयत्न किया और कहा - 'सुभद्रे! वसुदेव, सात्यकि और पिता अर्जुन ने जिस बालक अभिमन्यु को लाड़-प्यार से पाला था, वह काल के नियम से मारा गया है (उसकी आयु पूरी हो गई है, अतः वह मृत्यु के अधीन हो गया है)।॥ 32-33॥
On hearing Subhadra's lamentation in this manner, aunt Kunti, overwhelmed with grief, slowly tried to console her and said, 'Subhadre! The child Abhimanyu, who was loved and pampered by Vasudev, Satyaki and father Arjun, has been killed by the law of time (his life span is over, so he has become subject to death).॥ 32-33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥