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श्लोक  14.61.29 
ननु नामाद्य वैराटि श्रुत्वा मम गिरं सदा।
भवनान्निष्पतत्याशु कस्मान्नाभ्येति ते पति:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
विराटकुमारी! तुम्हारे पति आज मेरे पास क्यों नहीं आ रहे हैं, जो हमेशा मेरी आवाज़ सुनते ही जल्दी से घर से निकल जाते थे?
 
Viratkumari! Why is your husband not coming to me today, who would always leave the house quickly on hearing my voice?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)