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mahabharat 14.61.13-15h: मेरी पुत्री का प्रिय पुत्र अभिमन्यु युद्धभूमि में द्रोणाचार्य, भीष्म तथा सबसे बलवान कर्ण के साथ युद्ध करने का साहस रखता था। क्या ऐसा हो सकता है कि द्रोण, कर्ण और कृपाचार्य ने मिलकर उस बालक को छलपूर्वक मार डाला हो और इस प्रकार छल से मारा जाकर वह भूमि पर सो रहा हो? केशव! यह सब मुझे बताओ॥13-14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.61.13-15h 
कच्चिन्न निकृतो बालो द्रोणकर्णकृपादिभि:॥ १३॥
धरण्यां निहत: शेते तन्ममाचक्ष्व केशव।
स हि द्रोणं च भीष्मं च कर्णं च बलिनां वरम्॥ १४॥
स्पर्धते स्म रणे नित्यं दुहितु: पुत्रको मम।
 
 
अनुवाद
मेरी पुत्री का प्रिय पुत्र अभिमन्यु युद्धभूमि में द्रोणाचार्य, भीष्म तथा सबसे बलवान कर्ण के साथ युद्ध करने का साहस रखता था। क्या ऐसा हो सकता है कि द्रोण, कर्ण और कृपाचार्य ने मिलकर उस बालक को छलपूर्वक मार डाला हो और इस प्रकार छल से मारा जाकर वह भूमि पर सो रहा हो? केशव! यह सब मुझे बताओ॥13-14 1/2॥
 
My daughter's beloved son Abhimanyu always had the courage to fight with Dronacharya, Bhishma and the strongest of all Karna in the battlefield. Could it have happened that Drona, Karna and Kripacharya together killed that boy treacherously and thus, after being killed by deceit, he is sleeping on the ground. Keshav! Tell me all this'॥13-14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)